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बस्ती में ‘सफेद सोने’ की डकैती: सो रहा प्रशासन, दहाड़ रही माफियाओं की मशीनें!

कुर्सी के नीचे बह रही रेत: खनन अधिकारी की मिलीभगत या मजबूरी?

​अजीत मिश्रा (खोजी)

विशेष ब्यूरो रिपोर्ट: भ्रष्टाचार की ‘रेत’ पर सोता प्रशासन

  • बर्दिया लोहार में कानून तार-तार: जहाँ पट्टा वहाँ सन्नाटा, जहाँ मनाही वहाँ खुदाई का तांडव!
  • कागजों पर ‘साफ-सुथरा’ खेल, जमीन पर लूट की रेल; आखिर किसका है माफिया को संरक्षण?
  • एडीएम से एसडीएम तक ‘मौन’, माफियाओं के आगे क्या नतमस्तक है बस्ती प्रशासन?
  • साहब की मेज तक पहुँचता है ‘सुविधा शुल्क’? इसलिए अवैध खनन पर नहीं कसता शिकंजा!
  • रॉयल्टी फर्जी, कांटा गायब; सरकारी खजाने को करोड़ों की चपत लगा रही ‘अधिकारियों की तिकड़ी’!
  • मुख्यमंत्री की ‘जीरो टॉलरेंस’ को बस्ती के जिम्मेदारों ने दिखाया ठेंगा!

​बस्ती, उत्तर प्रदेश

​बस्ती में बालू माफियाओं का तांडव: क्या प्रशासन ने बेच दिया है अपना जमीर?

​बस्ती। जनपद के हर्रैया तहसील अंतर्गत माझा क्षेत्र का बर्दिया लोहार गाँव इन दिनों विकास के लिए नहीं, बल्कि ‘सफेद सोने’ की दिन-दहाड़े लूट के लिए चर्चा में है। यहाँ बालू माफियाओं का तांडव इस कदर हावी है कि शासन-प्रशासन के नियम-कानून कागजों के ढेर में दबकर दम तोड़ चुके हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि बस्ती मंडल के ऊंचे पदों पर बैठे जिम्मेदारों की नाक के नीचे यह खेल चल रहा है, फिर भी वे कुंभकर्णी नींद क्यों सो रहे हैं?

​जहाँ पट्टा वहाँ सन्नाटा, जहाँ मनाही वहाँ खुदाई

​खनन के खेल की हकीकत बेहद चौंकाने वाली है। सरकारी दस्तावेजों में जहाँ खनन का पट्टा आवंटित किया गया है, वहाँ वीरानी छाई है। लेकिन उसके उलट, जहाँ खनन प्रतिबंधित है, वहाँ माफियाओं की पोकलेन मशीनें दिन-रात दहाड़ रही हैं। सीमांकन स्थल सूना पड़ा है और बंधे के पास धड़ल्ले से अवैध खुदाई जारी है, जिससे न केवल राजस्व की चपत लग रही है बल्कि पर्यावरण को भी गहरा जख्म दिया जा रहा है।

​अधिकारी, राजस्व टीम और माफिया: भ्रष्टाचार की त्रिकोणीय ‘साठगांठ’

​क्षेत्र में चर्चा है कि यह लूट बिना ‘ऊपर’ के संरक्षण के मुमकिन नहीं है। खनन अधिकारी, स्थानीय राजस्व टीम और खनन माफियाओं की तिकड़ी ने मिलकर अवैध खनन को अपना व्यापारिक मॉडल बना लिया है। कागजों पर सब कुछ ‘दूध का धुला’ दिखाने वाले अधिकारी जमीन पर माफियाओं के साथ कदमताल कर रहे हैं। आरोप तो यहाँ तक हैं कि एडीएम से लेकर एसडीएम तक को पूरी जानकारी है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल ‘लिपापोती’ की जा रही है।

​बड़ा सवाल: क्या जिम्मेदारों की चुप्पी का कारण वह ‘सुविधा शुल्क’ है जो हर महीने उनकी मेजों तक पहुँच रहा है?

 

​बिना ‘कांटा’ दौड़ रहे ट्रक, फर्जी पर्चियों का मायाजाल

​नियमों की धज्जियां उड़ाने की हद यह है कि मौके से सरकारी कांटा (वे ब्रिज) गायब है। बिना वजन किए बालू लदे सैकड़ों ट्रक सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जो सड़कों को भी तबाह कर रहे हैं। इतना ही नहीं, फर्जी रॉयल्टी पर्चियों के जरिए बालू की खेप प्रदेश के अन्य हिस्सों में भेजी जा रही है। सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगाया जा रहा है, और संबंधित विभाग ‘अंजान’ बनने का स्वांग रच रहा है।

​विरोध की आवाज दबाने के लिए ‘फर्जी मुकदमों’ का सहारा

​जब बर्दिया लोहार के ग्रामीण अपनी जमीन और भविष्य को बचाने के लिए आवाज उठाते हैं, तो उन्हें इंसाफ की जगह पुलिसिया धौंस और फर्जी मुकदमों की सौगात मिलती है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन माफियाओं का लठैत बनकर काम कर रहा है। विरोध करने वालों को जेल भेजने की धमकी दी जाती है, जिससे जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है।

​लेख: आखिर कब तक ‘सफेद सोने’ से सनेगा अधिकारियों का हाथ?

​बस्ती जिले में अवैध खनन कोई नई बात नहीं है, लेकिन हर्रैया के बर्दिया लोहार में जो हो रहा है, वह प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कालिख पोतने जैसा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को बस्ती के अधिकारी अपने जूतों तले रौंद रहे हैं।

​जब पोकलेन मशीनें बंधे के पास गरजती हैं, तो क्या उसकी गूँज अधिकारियों के दफ्तर तक नहीं पहुँचती? जब बिना वेट ब्रिज के ट्रक निकलते हैं, तो क्या पुलिस की आँखें बंद हो जाती हैं? सच तो यह है कि यह ‘अंधेर नगरी’ अधिकारियों के संरक्षण में फल-फूल रही है। अगर जल्द ही इस ‘लूट’ पर लगाम नहीं कसी गई और दोषी अधिकारियों पर गाज नहीं गिरी, तो वह दिन दूर नहीं जब जनता सड़कों पर उतरकर इस ‘भ्रष्ट तंत्र’ का घेराव करेगी।

​ब्यूरो रिपोर्ट, बस्ती (उत्तर प्रदेश)

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